भूकंप आने या बम विस्फोट होने पर कई पीड़ित मलबे के नीचे दब रह जाते हैं। राहत एवं बचाव दस्ते के लिए इन्हें खोजना कभी-कभी असंभव हो जाता है। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के वैज्ञानिकों ने कीड़े जैसा दिखने वाला रोबोट विकसित किया जो आसानी से अपना आकार बदलकर किसी भी तरह के सुराख में प्रवेश कर सकता है। इसकी मदद से मलबों के ढेर में दबे व्यक्ति को ढूंढ़ना आसान हो जाएगा।
कैटरपिलर (झींगा) की तरह चलने वाले इस रोबोट को बनाने में अत्यंत पतले सेंसर और संवेदनशील आर्टिफिशियल मांसपेशियों का इस्तेमाल किया गया है। इस कारण यह रोबोट हर तरह के वातावरण में काम कर सकता है। रोबोट की ऊष्मीय चालकता बढ़ाने के लिए इसमें कार्बन के सूक्ष्मकणों के साथ क्रिस्टल इलेस्टोमर (रबड़ की तरह का लचीला पॉलीमर) के तरल रूप का प्रयोग किया गया है। इससे रोबोट को सक्रिय करने के लिए उचित ऊष्मा मिल जाती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि 28.6 मिलीमीटर लंबा रोबोट जरूरत अनुसार अपना आकार बढ़ा लेता है। इस रोबोट का कोमल और लचीला होना इसे अन्य पारंपरिक रोबोटों से अलग करता है। युद्ध या आपदा की स्थिति में इसका इस्तेमाल खोज, बचाव, चिकित्सा और पुनर्वास के लिए किया जा सकता है।

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